नौकरी छोड़ देशव्यापी पदयात्रा पर निकले इंजीनियर पहुंचे बोकारो..

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अगर आप में कुछ अच्छा करने की तमन्ना है तो इसके लिए आपका दृढ़संकल्प जरूरी है। इसी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ अपनी नौकरी तक छोड़ आशीष शर्मा नामक एक इंजीनियर देशव्यापी पदयात्रा पर निकला है। दिल्‍ली स्थित समयपुर बादली आशीष शर्मा की पदयात्रा का उद्देश्‍य देश में बच्चों की भिक्षाटन की प्रवृत्ति को खत्‍म करना है, ताकि वर्ष 2020 तक देश का हर बच्चा स्कूल जा सके। 17 हजार किलोमीटर की अपनी इस पदयात्रा के क्रम में तकरीबन साढ़े 10 हजार किमी पैदल चलकर आशीष शनिवार को बोकारो पहुंचे।

उन्मुक्त इंडिया नामक अपने इस खास अभियान के क्रम में आशीष ने जिले के डीसी मृत्युंजय कुमार वर्णवाल और एसपी कार्तिक एस. से समाहरणालय में भेंट की। उन्होंने बच्चों की भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की। डीसी, एसपी ने अपनी ओर से आशीष को यथासंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

इस दरम्यान पत्रकारों से बातचीत में आशीष ने कहा कि बच्चों को भीख देने के बजाय उन्हें खाना खिलाना अधिक श्रेयस्कर है। बाल भिक्षाटन के पीछे माफियाओं का हाथ होता है और बच्चों को भीख देने से ही उनकी फंडिंग होती है। फंडिंग जब नहीं मिलेगी तो उनका जाल स्वतः टूट जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-2016 में आशीष ने नौ ऐसे बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाया, जो भीख मांगते थे और नशा इत्यादी गतिविधियों मे लिप्त थे। लेकिन हर बच्चे को पकड़ कर ऐसे स्कूल मे नही भेजा जा सकता था तो आशीष ने यह मुद्दा खत्म करने की सोची और इसके लिए जनजागरुकता तथा प्रशासन की ओर से उपाय सुनिश्चित कराने का अभियान शुरू किया।

आशीष ने बताया कि आज देशभर में उनकी इस मुहिम को 40-45 आईएएस अधिकारियों का सहयोग मिल रहा है। आशीष के मुताबिक वह कक्षा छह से ही वृद्धाश्रम जा रहे हैं। जल्‍द ही उन्हें अहसास हो गया कि इस समस्‍या की जड़ बच्‍चों में ही है। अगर बच्‍चे ही खुश नहीं होंगे तो बुजुर्ग कैसे सुखी रह सकेंगे? सड़कों पर हजारों बच्‍चे भीख मांगते दिख जाते हैं, लेकिन कोई उनके लिए कुछ नहीं करता है। आशीष ने कहा, ‘मैं उनके लिए कुछ करना चाहता था, लेकिन मुझे पता था कि व्‍यक्तिगत रूप से 50 से 100 बच्‍चों से मिल सकता था। इसलिए मैंने अपने लक्ष्‍य को पाने के लिए पूरी युवा पीढ़ी को जोड़ने की शुरुआत की। इसके जरिये लोगों की भावनाओं को जगाना है।

उल्लेखनीय है कि मैकेनिकल इंजीनियर आशीष ने देश को बाल भिक्षावृति से मुक्त करने के लिये अपनी जॉब छोड़ दी और बीते 22 अगस्‍त 2017 जम्मू उधमपुर से इसे पूरे करने के लिए पदयात्रा पर निकले हुए हैं। 17 हजार किमी. की पदयात्रा को आशीष ने उनमुक्‍त इण्डिया का नाम दिया है। इस अभियान के तहत देश के 29 राज्‍यों व सात केंद्रशासित राज्‍यों के 4900 गांवों में बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए जागरूक किया जाएगा।

आशीष एक मोबाइल एप भी डेवलप कर रहे हैं, जिसकी मदद से पांच किलोमीटर के दायरे में किसी भी बाल भिक्षुक दिखने पर उसकी जानकारी अपलोड की जाए, ताकि आसपास के पुलिस अधिकारी व अनाथाश्रम उस बच्‍चे की मदद कर सकें। आशीष अभी तक जम्मू, हिमाचल, पंजाब , हरियाणा, राजस्थान, गोवा, दमन, सिलवासा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, सिक्किम, आसाम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, पश्चिम बंगाल राज्यों का सफर तय कर चुके हैं।

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